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व्यवस्था, जो नारी को न केवल आगे बढने की छूट दे, बल्कि उसे कुछ अधिकार देकर प्रोत्साहित भी करें. इन सब तत्वों ने संयुक्त रूप से आज की मध्यवर्गीय नारी में अद्भुत आत्मविश्वास भरा हैं. उसे अपनी शख्सियत एवं स्थिति के प्रति सचेत किया हैं.

डॉ. श्रीमती बूला कार

श्रीमती बूला कार का जन्म बाकुंडा पश्चिम बंगाल में हुआ. आपका संपूर्ण जीवन उपलब्धियो एवं गौरवगाथाओं का सम्मिश्रण हैं. वर्तमान में डॉ. कार प्राचार्या के पद से सेवानिवृत्त होकर अपना जीवन पूर्णतः साहित्य साधना को समर्पित कर चुकी हैं अपने जीवन में सभी दायित्वो को सफलतापूर्वक निर्वाह करते हुए डॉ. कार आज भी अत्यंत उर्जावान समर्पित एवं उत्साही दिखाई देती हैं अत्यंत मृदु स्वभाव व साहित्य के प्रति अगाध भक्ति आपको क्षेत्र व देश भर के साहित्यकारों के मध्य लोकप्रिय तथा श्रद्धेय बनाता हैं. अपने साहित्यिक जीवन का आरम्भ अत्यंत कम आयु में करने के पश्चात आपको अत्यंत विख्यात व प्रतिभाशाली साहित्यकारों का मार्गदर्शन व स्नेह प्राप्त हुआ साहित्य की लगभग हर विधा में आपकी रचनायें कई प्रतिष्ठित समाचारपत्रों एवं साहित्यिक पत्र पत्रिकाओ में प्रकाशित व प्रसिद्ध हो चुकी हैं. 

“इस ग्रंथ की खासियत यह हैं की लेखिका बने-बनाये फ्रेमवर्क को तोडती हैं और सहित्य इतिहास लेखन को अनुभवबोध से सिक्त करते हुए संवेदनात्मक धरातल पर प्रस्तुत करती हैं.”-डो.मनोज पांडेय हिंदी विभाग नागपुर विश्वविधालय डॉ.बूला कार के ग्रंथ बांगला साहित्य : स्रष्टि और द्रष्टि पर

श्रीमती कार की प्रतिभा कई साहित्यिक संगठनो व संस्थाओ द्वारा समय-समय पर सम्मानित व पुरस्कृत की गई हैं.

विभिन्न विषयों पर अनेकानेक रचनाओ के साथ कई ग्रंथ व पुस्तको का सृजन श्रीमती कार के द्वारा किया गया हैं.

श्रीमती कार की प्रतिभा कई साहित्यिक संगठनो व संस्थाओ द्वारा समय-समय पर सम्मानित व पुरस्कृत की गई हैं.

डॉ. कार के जीवन के कई सुंदर पलो के छायाचित्रो का संग्रह .अनेक साहित्यिक कार्यक्रमो में डॉ.कार सम्मानित व पुरस्कृत की गई हैं